Saturday, June 13, 2009

पर दिशाहीन कबतक?
















तुमने दिए पंख

कहा उड़ो…

दिखाया आकाश

जिसके असीम विस्तार में

उड़ना वाकई सुखद था

पर दिशाहीन कबतक?

6 comments:

ओम आर्य said...

सही सवाल है.........पर दिशाहीन कबतक...... बहुत सुन्दर

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सुन्दर

अविनाश वाचस्पति said...

तब तक
जब तक
न मिले
मंजिल
या
साहिल।

RAJNISH PARIHAR said...

सच में शिक्षा तो पूरी ही देनी चाहिए...!दिशाहीन उड़ने का कोई औचित्य नहीं है...

परमजीत बाली said...

बढिया!!

M Verma said...

उड़ना वाकई सुखद था
पर दिशाहीन कबतक?
bahut khoob