Friday, May 7, 2010

सिर्फ़ नाम बताइए




















नौकरी की अर्जी भरते हुए
बैंक की पर्ची भरते हुए
परिचय के समय नाम बताते हुए
मुझसे क्यों कहा जाता है
“पूरा नाम बताइए”
क्यों नाम के लिए जाति
किसी पूरक का काम करती है
क्यों संविधान ने आरक्षण लागू किया
पर नहीं बनाया वह कानून
जिसमें मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा जाता
“केवल नाम लिखें, जाति नहीं”
शायद तभी धीरे-धीरे खत्म हो जाते
विमर्श के कई मुद्दे
जिनको हमने मिटने नहीं दिया!

6 comments:

Sonal Rastogi said...

अपराजिता जी
अगर ये मुद्दे हट गए, जाति लुप्त हो गई तो नेताओं की प्रजाति का क्या होगा ,ये परजीवी इसपर ही ज़िंदा है

दिलीप said...

Sonal ji se poori tarah sehmat...isi jaati ke bhed pe hi to unki rotiyan sikti hain...

M VERMA said...

जाति का आडम्बर हटाने के लिये मुहिम की जरूरत है जैसे कि इसे बनाये रखने के लिये मुहिम जारी है.

संजय भास्कर said...

बहुत खूबसूरत ब्लॉग मिल गया, ढूँढने निकले थे। अब तो आते जाते रहेंगे।

संजय भास्कर said...

Sonal ji aur Verma jin se poori tarah sehmat.

mridula pradhan said...

very good.