Monday, November 29, 2010

बातें

बातें
सायास नहीं
अनायास की जाए तो
ज़्यादा सुंदर होती हैं.
बातें
लफ़्ज़ों से नहीं
आँखों से की जाए तो
ज़्यादा मार्मिक होती हैं.
बातें
हिचक से परे
हृदय के उच्छवास से आये तो
ज़्यादा स्थान लेती हैं.
बातें
क्षणिक प्रतिक्रिया से नहीं
स्वप्न के आशियाने में सजे तो
ज़्यादा उम्र पाती हैं.
इसतरह बातें
भरती है
जीवन में अर्थ
और
रचती हैं
संबंधों की गरिमा
अनवरत ....

8 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर सार निकाला है।

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

रवीन्द्र दास said...

अच्छी बातें.

अरुण चन्द्र रॉय said...

बातो ही बातों में एक सुन्दर कविता बन गई है.. रिश्तों की पहचान कराती कविता नाजुक सी कविता लगी...

Shilpa said...

bahut sahi baat hai. bahut khoobsurat kavita.
.
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Shilpa

भुपेन्द्र माया said...

bahut sargarbhit bate kah dee aapne bato ke bare me,

web hosting india said...

Everything is very open and very clear explanation of topic.

babbar.R said...

bahut khoobsurat