Thursday, September 10, 2009

हाथी


वे कुछ कहना चाहते हैं

कहने के लिए

बहाना चुन लिया

हाथी का

नाक, कान, सूँड़, पूँछ

पर नाम न कह सके

हाथी का

सब कह कर पहेली गढ़ दी

उत्तर में मुझ से भी

नाम सुनना चाहा

हाथी का!

Thursday, September 3, 2009

स्वार्थी हूँ


स्वार्थी हूँ
यह जानती हूँ!
इसलिए
कि तुम गलत न हो सको
मुझे एक और बार
होना पड़ेगा स्वार्थी.
इसलिए
कि तुम कह सको
तुमने मुझे जाना था सही
मुझे एक और बार
होना पड़ेगा स्वार्थी.
इसलिए
कि फिर तुम्हारी जुबाँ
न गुनहगार हो
न हो सिर लज्जित...
मुझे होना पड़ेगा स्वार्थी!

Sunday, August 16, 2009

हम



हम

नींद तो चाहते हैं

लेकिन थकना नहीं

साथ तो चाहते हैं

हाथ देना नहीं

कैसा समय है?

जब हम

सफल होना चाहते हैं

सार्थक नहीं !

Monday, August 10, 2009

कविता रचना कठिन काम है


भावों के उछाल को

दिमाग के सवाल को

बाँध पाना, संयत बनाना

बड़ा कठिन काम है दोस्त,

तुम कितनी सरलता से कहते हो

आज कल कुछ लिखो विखो

और कुछ नहीं तो

कविता ही कर डालो,

शायद तुम नहीं जानते दोस्त

यूँ कागज़ कलम उठाकर

बुन देने से मकड़जाल

कविता नहीं रची जाती,

कविता उगती है

भावों के स्पंदन से

विचारों की दरारों में,

तोड़ती है मन की कुंठाएँ

खोलती है खिड़कियाँ

छनकर पहुँचती है जहाँ से

धूप और हवा

कविता रचती है इतिहास

बुनती है भविष्य

उठाती है प्रश्न

जगाती है वर्तमान

ताकि हम सोने न पाएँ

ताकि हम रोते न रह जाएँ!